सुख-दुख:
अगर जीवन में ये सुख दुःख न होते,
तो लोक परलोक में स्वर्ग नरक न होते।
घोर कर्म, अपराध सब होते,
कोई रोक न कानून होते।
चलाते सब अपनी मनमानी होते,
रिश्ते नाते न कोई अपने होते।
प्रेम भाव के न कुछ मोल होते,
चलती नैया जीवन की बिन मांझी होते।
होती खत्म जब कोई यात्रा जीवन की,
न तुम रोते, न हम रोते।
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